Thursday, 21 July 2016

कल की बारिश

कल की बारिश,
हाँ कल की बारिश ने
जमी हुई रेत पर एक घास का 
तिनका उगाया है
देखी दो चार बूंदों की ताकत?
जिसने धरती पर एक नया जीवन ला दिया है

कल की बारिश ने
हाँ याद आया 
कुछ  खेत बहाए
एक पुल तोड़ा
नदियों के रस्ते भी बदल दिए हैं
देखी दो चार बूंदों की ताकत?
जिसे धरती पर विनाश लीला रची

कल की बारिश में
कुछ मजदूर दिहाड़ीगीर
बतिया रहे थे
खेतो की पुलों की रास्तों की 
कितना काम आ गया उनके लिए
देखी दो चार बूंदों की ताकत?
जिसने धरती पर रोजगार का सृजन किया